DESTINAT की कहानियाँ
बिना डिब्बे का तोहफ़ा

तीसरी बार नूबो ने वही सीपी सिर से लगाई, हिलाई और खिड़की की चौखट पर रख दी।
बाहर बर्फ़ गिर रही थी। रसोई में जिंजरब्रेड ठंडे हो रहे थे और ओरुमी तय कर रहा था कि बो तोहफ़े पर अच्छा लगता है, कुर्सी पर या खुद उस पर।
“सीपी खराब है?” फ़िरा ने पूछा।
“नहीं। बस उसे दूसरा समुद्र याद है।”
नूबो ने किनारे पर उँगली फेरी।
“घर पर लहरें पहले चपटी चट्टानों से टकराती थीं। फिर पानी लौटते समय कंकड़ खनकते थे। शाम को बोर्ड पर बैठकर देर तक सुन सकते थे।”
फ़िरा पास बैठ गई। नूबो ने गहरे पानी, हल्के किनारे और क्षितिज के पास नेपच्यून की बात की। फिर पूछा कि जिंजरब्रेड बचे हैं क्या।
बचे थे। फ़िरा ने तीन दिए, लेकिन उसने एक ही खाया।
अगले दिन ओरुमी कार्यशाला में मिला।
“नूबो को उसके समुद्र का छोटा हिस्सा देना चाहती हूँ।”
ओरुमी ने फ़र्श देखा।
“समुद्र बना सकता हूँ। शायद पहले मेज़ बह जाएगी।”
“आवाज़ की बात कर रही हूँ। और किनारे पर साथ बैठने की।”
ओरुमी ने सिर से बो उतारा।
“तो उसके लिए किनारा लाते हैं।”
फ़िरा ने धारा से मुट्ठी भर चिकने कंकड़ लिए। हिलाने पर सरसराने वाली सूखी फलियाँ और दो चौड़ी लकड़ियाँ खोजीं। ओरुमी उथली लकड़ी की नाँद लाया। फिर मन बदलकर दूसरी लाया, क्योंकि पहली में कभी तुलसी उगानी थी।
कार्यशाला में पत्थर सजाए, फलियाँ धागे पर टाँगीं और आज़माने लगे।
खर्र।
खटखट।
धम!
नूबो ने दरवाज़े से झाँका।
“कुछ गिर गया?”
मेज़ के ऊपर नाँद झुकाए फ़िरा रुक गई।
“तोहफ़ा बनना था। अभी पूरा नहीं हुआ। तुम्हारा समुद्र बनाने की कोशिश है।”
नूबो ने कंकड़ देर तक देखे।
“ऐसी आवाज़ नहीं होती।”
फ़िरा की पंखुड़ी जैसी बाँहें धीरे झुक गईं।
“जानती हूँ। जगह ठीक से सोच नहीं पा रही।”
ओरुमी ने पत्थर नाँद के दूसरे सिरे पर झुकाए।
“अच्छा हुआ आ गए। मैं अभी हिमस्खलन बना रहा था।”
नूबो के चेहरे का सबसे छोटा सितारा टिमटिमाया। वह पास आया।
“यहाँ बहुत ढलान है। और सारे पत्थर साथ चल पड़ते हैं।”
नाँद के नीचे लकड़ी रखी ताकि हल्के से झूले। फ़िरा ने छोटे कंकड़ चुनकर मोटे कपड़े की पट्टियों से अलग किए। ओरुमी ने फलियाँ खिड़की के पास, चूल्हे से उठती गर्म हवा में रखीं।
शाम तक काम किया।
नूबो उँगलियों से मेज़ पर ताल देता। फ़िरा पत्थर ऐसे लगाती कि एक-एक करके लुढ़कें। ओरुमी ने खोजा कि खुरदरे तख्ते पर पुराना ब्रश चलाने से आश्चर्यजनक रूप से असली-सी सरसराहट आती है।
“कुछ-कुछ लहर जैसी,” नूबो ने कहा।
“कुछ-कुछ झाड़ू जैसी,” ओरुमी ने जोड़कर धीरे आज़माया।
क्रिसमस की पूर्वसंध्या पर पेड़ के नीचे तोहफ़े थे। नूबो ने छोटी टॉर्च, रंगों का डिब्बा और नोटबुक का नया कवर खोला, फिर तुरंत नोटबुक खोजने लगा।
“बाकी तोहफ़ा कार्यशाला में है,” फ़िरा ने कहा।
अंदर तीन नीची सीटें थीं। दीवार पर गहरा कपड़ा टाँगा था और ऊपर फ़िरा ने ओरुमी का बनाया नेपच्यून का गोल चित्र लगाया था।
वे बैठ गए।
फ़िरा ने नाँद झुकाई। कंकड़ धीरे लुढ़के। ओरुमी ने तख्ते पर ब्रश चलाया। खिड़की के पास फलियाँ सरसराईं।
नूबो बहुत देर कुछ नहीं बोला।
“फिर करें?” फ़िरा ने फुसफुसाया।
“रुको।”
उसने सिर ऐसे झुकाया जैसे कुछ सुन रहा हो।
“अब। अगली लहर आ रही है।”
फ़िरा ने नाँद झुलाई। ओरुमी ने वह ब्रश खोजा जिस पर बैठा था।
दीवार के पार आग चटखी। रसोई से जिंजरब्रेड की खुशबू आई। नूबो ने सीट दोस्तों के पास खिसका ली।
“मेरे किनारे पर इतने अच्छे बिस्कुट नहीं थे।”
“इनका पहाड़ सोच सकता हूँ,” ओरुमी ने कहा।
“पहले रसोई देखते हैं,” फ़िरा ने कहा।
उस शाम वे कई बार अपने समुद्र से छुट्टी लेकर और खाने गए।