DESTINAT की कहानियाँ
एक और नृत्य

फ़िरा लाल फ़ीते के सिरे पकड़े थी और ओरुमी क्रिसमस के पेड़ की डाली पर बो बाँधने की कोशिश कर रहा था।
पहला फंदा छोटा बना। दूसरा इतना बड़ा कि लकड़ी का सितारा छिप गया।
“फिर कोशिश करें?” फ़िरा ने पूछा।
ओरुमी ने अपना काम देखा।
“अब देखना है कैसा बनता है।”
उसने फ़ीते का एक सिरा धीरे खींचा। बो डाली पर बैठ गया, असमान और थोड़ा टेढ़ा, पर सुंदर। गाँठ के पास हाथ मिल गए। फ़िरा अब फ़ीता छोड़ सकती थी। लेकिन तुरंत नहीं छोड़ा।
ओरुमी ने भी कुछ पल पंजा वहीं रखा।
घर में संतरे की खुशबू थी। खिड़की पर हिमकण पिघल रहे थे। पास के कमरे से उस संगीत डिब्बे की धीमी धुन आ रही थी जिसे नूबो ने खाने से पहले ठीक किया था।
फ़िरा ने ओरुमी को देखा। पेड़ की गर्म रोशनी में उसके रोओं के लाल घुमाव पतले फ़ीतों जैसे लग रहे थे।
“मुझे अच्छा लगा,” उसने कहा।
“बड़ा वाला फंदा?”
“वह भी।”
ओरुमी ने बो देखा। दो चाँदी जैसे पक्षी सोचे जो उस पर बैठ सकें। इतने साफ़ सोचे कि अगले पल डाली पर पंख फड़फड़ाने लगे। एक ने फ़ीते का दूसरा सिरा ठीक किया, दूसरे ने सिर पंख के नीचे छिपा लिया।
फ़िरा धीरे हँसी।
“इन्हें ऐसे ही रहने दो। और कुछ नहीं चाहिए।”
ओरुमी ने पेड़ के पास की जगह देखी।
“शायद एक और…”
फ़िरा ने पंखुड़ी जैसी बाँह के सिरे से उसका पंजा धीरे पकड़ा।
“मेरे साथ नाचोगे?”
उसने बड़ा कमरा या पूरा ऑर्केस्ट्रा नहीं सोचा। बस कुर्सी सरका दी ताकि पहले चक्कर में न टकराएँ।
“आज़माते हैं।”
पहले कदम धुन से ठीक नहीं मिले। फ़िरा दाईं ओर गई और ओरुमी भी। लगभग नाकें टकरा गईं। फिर दोनों एक-दूसरे के लिए जगह बनाने लगे।
“शायद थोड़ा कम संकोच करें,” फ़िरा ने कहा।
ओरुमी मुस्कुराकर धीरे चला।
दूसरी बार आसान था। क्रिसमस के पेड़ के पास, कुर्सी और लंबे मेज़पोश के किनारे से गुज़रते झूमे। फ़िरा की पंखुड़ी उसकी वास्कट में फँसी तो साथ रुके, छुड़ाई और फिर नाचने लगे।
वह दोस्तों से रोज़ गले मिलती थी। लेकिन अब ख़ासकर उसके पास रहना चाहती थी, संगीत कुछ पल शांत हो तब भी।
“तुम्हारे साथ रहना अच्छा लगता है,” उसने कहा।
ओरुमी ने जुड़े हुए हाथ देखे।
“मुझे भी। यहाँ थोड़ी देर और रह सकता हूँ।”
उसे अगले ख़याल के पीछे जाने की जल्दी नहीं थी। यह देखकर फ़िरा खुश हुई।
दरवाज़े के ऊपर मिसलटो की टहनी थी जो वह सुबह जंगल से लाई थी। अगले चक्कर में उसके नीचे रुके। ओरुमी ने ऊपर देखा।
“अच्छा हुआ यहाँ घंटी नहीं टाँगी।”
“क्यों?”
“अब तक तीन बार सिर उससे टकरा गया होता।”
फ़िरा ने उसके कंधे पर गाल रखा। कुछ देर लगभग एक जगह झूमते रहे।
“लगता है मुझे तुमसे प्यार हो गया है,” उसने धीरे कहा।
ओरुमी थोड़ा और पास आया।
“मुझे भी तुमसे प्यार हो गया है।”
क्रिसमस के पेड़ पर चाँदी जैसे पक्षियों ने पंख समेटे। एक ने चोंच पंखों में छिपा ली, जैसे शाम का काम पूरा समझ लिया हो।
घड़ी ने बारह बजाने शुरू किए। फ़िरा ने ओरुमी से दूर हुए बिना घंटे गिने। आखिरी आवाज़ मिटते ही संगीत डिब्बा भी शांत हो गया।
“एक और नृत्य?” उसने पूछा।
ओरुमी ने छोटी चाबी खोजकर डिब्बा चढ़ाया। फिर उसी तरह लौटा, कुर्सी से ध्यान से बचता हुआ।
फ़िरा ने पंखुड़ी जैसा हाथ बढ़ाया।
पहले चक्कर पर पेड़ का बो हल्के से हिला। इस बार दोनों फंदे बिलकुल सही लग रहे थे।