वारसॉ की सड़क पर गीले पत्तों और चिमनियों के धुएँ की गंध थी। नीली धारा ने दोस्तों को एक इमारत के छज्जे के नीचे उतारा। चमकती हुई पट्टी पर तारीख उभरी: 10 नवंबर 1918।
टोपी पहने एक लड़का दरवाज़े की ओर दौड़ रहा था।
"लेओन साहब! पिल्सुद्स्की लौट आए हैं! आज सुबह वे वारसॉ पहुँचे!"
एक छोटे छापेखाने से दाग़दार एप्रन पहने एक आदमी ने झाँका।
"माग्डेबुर्ग से?"
लड़के ने ज़ोर-ज़ोर से सिर हिलाया।
"बिल्कुल वहीं से!"
ओरूमी उसके पीछे दौड़ने ही वाला था। नूबो ने उसे धीरे से रोक लिया।
"पहले पता कर लें कि हो क्या रहा है।"
मुद्रक ने उन्हें छत के नीचे बुलाया। उसने बताया कि जर्मन अधिकारियों ने यूज़ेफ़ पिल्सुद्स्की को माग्डेबुर्ग में कैद कर रखा था और अब वे वारसॉ लौट आए हैं। लंबे युद्ध के बाद यूरोप में बड़े बदलाव हो रहे थे। पोलिश राज्य के फिर से उभरने की आशा बढ़ रही थी।
"एक स्वतंत्र राज्य अपने मामलों के बारे में ख़ुद निर्णय ले सकता है," उसने कहा। "बहुत से लोग बरसों से ऐसे ही पोलैंड के लिए प्रयास कर रहे थे।"
"तो क्या कल तक सब कुछ तैयार हो जाएगा?" ओरूमी ने पूछा।
लेओन साहब ने बिखरे हुए काग़ज़ों की ओर देखा।
"हम यह अख़बार भी एक ही झटके में तैयार नहीं कर सकते। और एक देश को बनाने में तो उससे बहुत ज़्यादा काम लगता है।"
लड़के ने अपना नाम स्तेफ़ान बताया। वह छापेखाने में अपने पिता की मदद करता था और आज एक जगह टिक ही नहीं पा रहा था। वह नई-नई खबरें लाता, लेकिन कभी-कभी ऐसी अफ़वाहें भी दोहरा देता, जिनकी अभी किसी ने जाँच नहीं की थी।
"कहते हैं, सब कुछ तय हो चुका है!" उसने घोषणा की।
"ठीक-ठीक क्या तय हुआ है? और यह तुमसे किसने कहा?" पिता ने पूछा।
स्तेफ़ान ने अपनी टोपी ठीक की। यह तो उसे पता ही नहीं था।
नूबो ने उनकी यात्रा-कॉपी खोली। उसमें अभी बहुत से ख़ाली पन्ने थे। उसने तय किया कि वह सिर्फ़ वही खबरें लिखेगा, जिनकी वे पुष्टि कर सकेंगे।
नीली धारा ने धीरे से सरसराहट की। खिड़की के बाहर शाम हुई और फिर रोशनी दोबारा सुबह जैसी हो गई। रास्ते ने उन्हें एक दिन आगे पहुँचा दिया था।
11 नवंबर था।
छापेखाने में समाचार पहुँचा कि रीजेंसी परिषद ने अपने अधीन पोलिश सेना की कमान पिल्सुद्स्की को सौंप दी है। लेओन साहब ने समझाया कि परिषद अब तक शासन चलाने वाली संस्थाओं में से एक थी।
"यह एक महत्वपूर्ण कदम है," उन्होंने कहा। "लेकिन अलग-अलग जगहों पर हालात अलग हैं। अभी साझा शासन बनाना, देश का जीवन व्यवस्थित करना और सुरक्षा का ध्यान रखना है। हर जगह लड़ाई ख़त्म नहीं हुई है।"
स्तेफ़ान ने अपनी टोपी घुमाना बंद कर दिया।
"जब इतना कुछ बाकी है, तो क्या हम खुश हो सकते हैं?"
फ़ीरा उसके पास आकर खड़ी हो गई।
"हम किसी महत्वपूर्ण बात की खुशी मना सकते हैं, भले ही अभी बहुत-सा काम बाकी हो।"
सड़क पर लोग रुक रहे थे, बातें कर रहे थे और एक-दूसरे को खबरें सुना रहे थे। कुछ खिड़कियों में सफ़ेद और लाल रंग दिखाई देने लगे। नूबो ने पढ़ना सीखते आंतेक और पोलिश गीत सुनते परिवारों के बारे में सोचा। उसे पादेरेव्स्की का संगीत कार्यक्रम याद आया।
छापेखाने में ख़ाली काग़ज़ों का एक ढेर गिर गया। ओरूमी तुरंत उन्हें बटोरने बैठ गया। स्तेफ़ान सभी काग़ज़ एक साथ उठा लेना चाहता था, लेकिन फ़ीरा ने छोटे-छोटे ढेर बनाने में उसकी मदद की।
"इतनी सारी जगहों पर कुछ महत्वपूर्ण हो रहा था," नूबो ने कहा। "हम यह सब एक वाक्य में नहीं समेट सकते।"
"एक कहानी में समा सकते हैं," लेओन साहब ने जवाब दिया। "बस उसे ठीक से सुनाना होगा।"
अपने समय में लौटने पर उन्हें एटलस के एक पन्ने पर यह लिखा मिला: "11 नवंबर - राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस।" नूबो ने कॉपी में जोड़ा कि यह स्वतंत्रता फिर पाने की एक प्रतीकात्मक तारीख है, जिस तक पहुँचने में बहुत-सी घटनाओं और बहुत-से लोगों के प्रयासों की भूमिका थी।
ओरूमी ने लंबी टिप्पणी को देखा।
"तो यह एक छोटे-से काग़ज़ पर लिख देने लायक समाचार नहीं था।"
"इसीलिए तो हमने इतने ख़ाली पन्ने छोड़े थे," नूबो ने जवाब दिया।
खिड़की के बाहर नवंबर के पत्ते सरसराने लगे। फ़ीरा ने स्याही सूखने के बाद ही कॉपी बंद की।
