नूबो को पुस्तकालय में एक बड़ा एटलस मिला। उसने उसे मेज़ पर फैलाया और ओरूमी तुरंत अपनी कुर्सी पास खिसका लाया।
"क्या हम अगली यात्रा के लिए जगह ढूँढ़ रहे हैं? शायद ऐसी जगह, जहाँ पेड़ों पर पास्ता उगता हो?"
फ़ीरा मुस्कुराई और पन्ने का मुड़ता हुआ कोना दबाकर पकड़ लिया। नूबो धीरे-धीरे पन्ने पलटने लगा। एक नक्शे पर पोलैंड का नाम लिखा था। लेकिन अगले नक्शे पर, जो उसके बाद का समय दिखाता था, उसे वह नाम नहीं मिल रहा था।
"कोई देश ऐसे ही भाप बनकर गायब तो नहीं हो सकता," उसने कहा।
तभी पन्नों के बीच नीली रोशनी की एक लकीर चमकी। नीली धारा ने एक घेरा बनाया और दोस्तों के सामने चमकता हुआ रास्ता खोल दिया।
कुछ ही देर बाद वे एक लकड़ी के घर के सामने खड़े थे। धारा की दिखाई छोटी-सी पट्टी पर एक साल उभरा: 1795।
अधखुले दरवाज़े से शब्दों को धीरे-धीरे जोड़कर पढ़ने की आवाज़ आ रही थी। मेज़ के पास एक लड़का बैठा था। एक बुज़ुर्ग महिला किताब में उँगली से एक-एक शब्द दिखा रही थीं।
"माफ़ कीजिए," नूबो बोला। "क्या यह पोलिश भूमि है?"
"हाँ," महिला ने जवाब दिया। "अंदर आओ। मैं आंतेक की दादी हूँ।"
ओरूमी ने खिड़की से झाँका। उसे एक बाग़, एक सड़क और टोकरी लिए पड़ोसन दिखी।
"सब कुछ तो अपनी जगह पर है! फिर नक्शे से पोलैंड क्यों गायब है?"
दादी ने किताब रख दी।
"रूस, प्रशिया और ऑस्ट्रिया ने हमारी भूमि आपस में बाँट ली है। इसी साल आख़िरी विभाजन हुआ। पोलैंड ने अपना स्वतंत्र राज्य खो दिया। अब यहाँ विदेशी शासकों का शासन है।"
मेज़ के आसपास सन्नाटा छा गया। फ़ीरा आंतेक के और पास खिसक आई।
"और तुम अब भी पोलिश में पढ़ रहे हो।"
"मैं सीख रहा हूँ," उसने जवाब दिया। "कभी-कभी मेरे अक्षर उलझ जाते हैं।"
"मेरे रास्ते उलझ जाते हैं," नूबो ने स्वीकार किया। "लेकिन सिर्फ़ इस वजह से यात्रा करना बंद तो नहीं कर देना चाहिए।"
दादी ने उन्हें उन परिवारों के बारे में बताया, जो बच्चों को अपनी भाषा, गीत और यादें सौंपते थे। लोग अब भी अपने घरों में रहते थे, काम करते थे और याद रखते थे कि वे कौन हैं। अपना राज्य न होने से वे धरती से मिट नहीं गए थे।
आंतेक फिर पढ़ने लगा। ओरूमी उसे कठिन शब्द बताने ही वाला था, लेकिन फ़ीरा ने उसके कंधे को हल्के से छुआ। वे इंतज़ार करते रहे। लड़के ने ख़ुद वह शब्द पढ़ लिया।
दरवाज़े में नीली धारा फिर झिलमिलाई। इस बार दोस्त इटली की धूप से भरी एक सड़क पर निकले। जुलाई 1797 था।
पास के एक कमरे से पोलिश शब्द सुनाई दे रहे थे। मेज़ पर काग़ज़ लिए एक आदमी बैठा था। उसके पास कुछ पोलिश सैनिक खड़े थे, जो अपने घर से दूर सेवा कर रहे थे।
"ये यूज़ेफ़ विबित्स्की हैं," उनमें से एक ने समझाया। "हमारे लिए एक गीत लिख रहे हैं।"
फ़ीरा ने लिखी हुई पंक्तियों को देखा।
"किस बारे में?"
"पोलैंड के बारे में। और इस आशा के बारे में कि हम वहाँ लौट सकेंगे," विबित्स्की ने जवाब दिया।
किसी ने धुन गुनगुनानी शुरू की। थोड़ी देर में और आवाज़ें भी जुड़ गईं। नूबो ध्यान से सुन रहा था। वह अभी सारे शब्द नहीं समझता था, लेकिन देख रहा था कि गाने वाले कैसे तनकर बैठ गए थे और कितने ध्यान से एक-दूसरे को देख रहे थे।
जब दोस्त पुस्तकालय लौटे, तो उन्होंने किताब में उस गीत के बारे में जानकारी खोजी। समय के साथ वह पोलैंड का राष्ट्रगान बना, जिसे मज़ूरेक दोंब्रोव्स्किएगो के नाम से जाना जाता है।
ओरूमी ने एक पेंसिल उठाई।
"मैं उस नक्शे पर पोलैंड लिख देता हूँ!"
नूबो ने धीरे से एटलस बंद किया।
"वह नक्शा दिखाता है कि उस समय शासन किसका था। अब हम समझते हैं कि कौन-सी बातें वह अकेला नहीं दिखा सकता।"
फ़ीरा ने उनकी यात्रा-कॉपी खोली। उसने एक छोटा-सा घर, एक किताब और संगीत के कुछ चिह्न बनाए। उनके नीचे नूबो ने लिखा: "लोगों ने याद रखा।" ओरूमी ने कठिन शब्द पर झुके आंतेक का चित्र जोड़ दिया। इस बार उसे जवाब बताने की जल्दी नहीं थी।
