नूबो को आसमान देखते रहने की आदत है, जब तक कोई याद न दिलाए कि पैरों के नीचे भी दुनिया है। तब नीचे देखता है और अक्सर कहीं जाने की नई वजह मिलती है। कभी चट्टान के पीछे खोता रास्ता, कभी सबसे अलग आवाज़ वाली सीपी। और कभी वह ट्राम जिसमें वह सिर्फ़ यह जानने चढ़ गया कि सूटकेस वाले लोग कहाँ जा रहे हैं।
नूबो एक दूर की दुनिया की बात करता है जहाँ से नेपच्यून दिखता है। उसे गहरा पानी, हल्के किनारे और चट्टानों की दरारों में गुनगुनाती हवा याद है। नक्शे पर वह दुनिया दिखाने की कोशिश करे तो उँगली हमेशा बने बिंदुओं के बीच रुकती है। अंत में कंधे उचका देता है। लगता है नक्शा बनाने वाला अभी वहाँ पहुँचा नहीं।
अपने घर पर नूबो ने लहरों से यात्रा सीखी। वह घंटों देखता कि पानी रुकावटों के चारों ओर कैसे बहता और अभी छोड़ी जगहों पर लौटता है। फिर पहला बोर्ड बनाया। वह थोड़ा ज़्यादा चौड़ा, एक तरफ़ भारी और मोड़ पर बड़ा ज़िद्दी था। नूबो बार-बार उसे सुधारता रहा और सीखा कि कुछ समाधान गीले सिर से ज़्यादा आसानी से आते हैं।
उसी बोर्ड ने उसे पहली बड़ी यात्रा पर पहुँचाया। एक शाम खाड़ी पर घने बादलों के बावजूद पानी पर रोशनी की पतली लकीर दिखी। वह धारा के विरुद्ध चल रही थी। नूबो उसके पीछे उस पत्थरीले मेहराब तक गया जहाँ सर्फ़िंग के बाद आराम करता था। इस बार दूसरी तरफ़ अनजाना किनारा था। रेत पर लाल पत्थर और ऊपर दो चाँद थे।
कुछ पल वह बोर्ड पर एकदम स्थिर बैठा रहा। फिर सावधानी से चप्पू चलाकर पास गया। रेत छुई, पत्थर उठाया और यादगार रख लिया। मेहराब से लौटने से पहले अनोखा आसमान देर तक देखा। अगली सुबह वैसी और रोशनी की लकीरें खोजने लगा। समझ गया कि कुछ ऐसा मिल गया है जिसे अब छोड़ नहीं सकेगा।
पेट पर चमकता गोला यात्राओं में उसकी मदद करता है। भीतर नन्हे बिंदु ऐसे घूमते हैं जैसे काँच में आकाशगंगा बंद हो। नीली धारा पास हिले तो वे नया आकार बनाते हैं। नूबो नोटबुक से तुलना करके उन्हें पढ़ने की कोशिश करता है। गलतियाँ भी होती हैं। एक बार समुद्र का रास्ता समझकर ब्रशों की अलमारी में पहुँच गया। आज तक सोचता है कि आकार गलत पढ़ा था या आखिरी शेल्फ़ के पीछे देखने का धैर्य नहीं रखा।
नूबो का मन अच्छे विचारों से और सूटकेस ऐसी चीज़ों से भरा है जिनकी उपयोगिता हमेशा समझा नहीं सकता। पहली यात्रा का चिकना पत्थर, सीपी, कुछ टिकट और फिर देखने की जगहों के चित्र साथ रखता है। तारों के समूह और सड़कों के नक्शे में समानता देख सकता है। और आधा दिन उस नोटबुक को खोज सकता है जो सुबह से बाँह के नीचे दबाए है।
यात्राएँ उसे धरती पर भी लाई हैं। लहरों से प्रेम हुआ, लेकिन बेकरी, चलती सीढ़ियाँ और बालकनी में फूल सींचते लोगों को भी उतनी देर देखा। अभी नहीं समझता कि सुंदर सीपी को दराज़ में क्यों बंद करें या समुद्र से क्यों जाएँ जब एक दिन और रह सकते हैं। हर चीज़ के बारे में पूछता है। कभी जवाब नीली धारा से भी जल्दी नई जगह पहुँचा देता है।
अब नूबो आपको भी साथ यात्रा पर बुलाता है। उसके रोमांच में अनजाने ग्रह, परिचित शहर, बेचैन समुद्र और वे जगहें हैं जहाँ हाथ में पेंसिल लेकर पहुँचना बेहतर है। उसके पास बहुत सवाल और ध्यान से लिखे कुछ विचार हैं। शायद नोटबुक फिर कहीं रखकर भूल गया है। लेकिन सूटकेस दरवाज़े पर तैयार है और चेहरे का सबसे छोटा सितारा तेज़ चमकने लगा है।