सबसे पहले उसकी बड़ी अंबर-सी आँखें दिखती हैं। फिर बाकी सब: गुलाबी और क्रीम पंखुड़ियाँ, खूबसूरती से मुड़ी मशरूम टोपियाँ और छोटी झालरें, जो सिर उत्सुकता से झुकाने पर हिलती हैं। वह ऐसी लगती है जैसे किसी अनोखे फूल और जंगल के मशरूम ने साथ रहने का नया तरीका सोचा हो और फिर रोमांच पर निकल पड़े हों।
उसका शरीर फूलों की पंखुड़ियों जितना मुलायम और नाज़ुक है। चलते समय उसकी परतें हल्के से लहराती हैं और बारिश के बाद किनारों पर बूँदें जमती हैं। फ़िरा अक्सर उन्हें झाड़ना भूल जाती है। उससे पहले कोई और दिलचस्प चीज़ उसका ध्यान खींच लेती है।
जिज्ञासा उसे बहुत दूर ले जा सकती है।
बचपन में उसकी पूरी दुनिया एक खुले मैदान में समाती थी। वह ज़मीन से निकली हर जड़, सबसे आरामदेह काई और बारिश से बचाने वाला पत्ता जानती थी। लेकिन एक सुबह धारा के पार उसे सुनहरी चमक दिखी। वह उसका स्रोत खोजने चल पड़ी, इस भरोसे कि दोपहर से पहले लौट आएगी।
रास्ते में उसे जड़ों के नीचे सुरंग, उड़ते बीजों से भरा मैदान और हवा में धीरे गुनगुनाता मशरूम मिला। आख़िर रोशनी तक पहुँची तो वह ज़मीन से बहुत ऊपर खिलते एक विशाल फूल से आ रही थी। फ़िरा उसके नीचे बैठकर देर तक देखती रही। घर लौटी तो थकी हुई थी, पंखुड़ियों में बीज और मन में सवाल थे। अगले दिन ही वह जानना चाहती थी कि अगले मोड़ के पीछे क्या है।
रोज़ की एक ज़रूरत है जिसकी जगह सबसे अच्छा रोमांच भी नहीं ले सकता: गले मिलना।
खाने के समय भी उसकी आँखें काम आती हैं। फ़िरा किसी निवाले पर ध्यान लगाती है और अगले पल वह गायब हो जाता है। खाना आँखों से होकर नहीं जाता; बस थाली से गायब हो जाता है, जैसे कोई छोटा जादू हुआ हो।
इस तरह गायब करने के लिए स्ट्रॉबेरी और क्रीम उसे सबसे पसंद हैं।
लेकिन एक शर्त है: साथ में कोई और हो। फ़िरा भरे कटोरे के सामने धैर्य से बैठकर साथ का इंतज़ार कर सकती है। दूसरी कटोरी आने और किसी के पास बैठने पर ही उसकी आँखों में वह जानी-पहचानी खुशी चमकती है।
बेशक फ़िरा के अपने मूड भी हैं। छोटी बात पर रूठकर बाँहें बाँध लेती है और इतना प्यारा चेहरा बनाकर मुँह फेरती है कि कभी सब कुछ समझने से पहले ही माफ़ी माँग लेते हैं। वह रूठने के बाद लौटना, गलती मानना और पहले गले मिलने के लिए बाँहें खोलना भी सीख रही है। आम तौर पर ज़्यादा देर रूठ नहीं पाती; उसे सबके कामों के बारे में बहुत जिज्ञासा रहती है।
अब फ़िरा आपको भी अपने रोमांच में बुलाती है। उसके रंग भरने के पन्नों में जंगल की खोजें, अनोखी जगहें, छोटी गलतफ़हमियाँ और दोस्ती में बदलती मुलाकातें हैं।
आराम से बैठें और अपनी रंगीन पेंसिलें तैयार रखें। फ़िरा को अगले मोड़ पर कुछ दिख भी गया है।